अपार्थिव
तत्व की पहचान—(प्रवचन—पांचवां)
दिनांक: 3
अगस्त, 1986,
3. 30
अपराहन, सुमिला,
जुहू, बंबई
प्रश्नसार:
1—जब
कोई मुझसे छल और
दगावाजी करता
है या जब कोई मुझे
वस्तु की तरह
उपयोग करता है,
ऐसी स्थिति में
मुझे क्या करना
चाहिए?
2—विपस्सना
की साधना में कैथार्सिस
कब होती है?
मैं विपस्सना
का अभ्यास करता
हूं। मेरा संगीता
का कार्यक्षेत्र
होश की दिशा में
मेरे लिए किस प्रकार
सहायक हो सकता
है?
3—दिन
में अधिक समय ध्यान
में डूबी,
खोई रहती हूं।
शरीर क्षीण हुआ
है। कुछ समय पहले
दलाई लामा के डाक्टर
ने मेरा हाथ पकड़
कर किा कि मुझे
अधिक पार्थिव होने
की जरूरत है। कृपया
बातएं कि मुझे
क्या करना है?



