सारा विश्व एक पागलखाना बना हुआ है—ओशो
(अमेरिका में तथा विश्व भ्रमण के दौरान ओशो ने जगह-जगह विश्व के पत्रकारों के साथ वार्तालाप किया। ये सभी वार्तालाप ‘’दि लास्ट टैस्टामैंट’’ शीर्षक से उपलब्ध है। इसके छह भाग है लेकि अभी केवल एक भाग ही प्रकाशित हुआ है।)
ये पत्रकार वार्ताएं जुलाई 1985 और जनवरी 1986 के बीच संपन्न हुई।
(इस अंक में प्रकाशित अंश ओशो के अमेरिका प्रवास से है) प्रश्न—ओशो, अब मैं एक विषय की और मुड़ता हूं। पुन:, आपके और आपके संन्यासियों के बारे में कहा या लिखा गया है उसे मद्देनज़र रखते हुए यह कि लोगों में भय पैदा होता है जब वे आपके अंग रक्षकों को हथियारों से लैस देखते है। और ऐसी अफवाह है कि इस रैंच पर कहीं हथियारों का बड़ा भंडार है। क्या यह सही है? यदि यह सही है तो ये हथियार यहां क्यों रखे जाते है?


















