'नव—संन्यास
क्या?':
गीता—सत्र
से संदर्भ
प्रवचनांश
बम्बई
प्रथम सप्ताह
जनवरी 1971
एवं
ला प्रथम
सप्ताह फरवरी 1971
जो भी
मैं कह रहा
हूं संन्यास
के संबंध में
ही कह रहा हूं।
यह सारी गीता
संन्यास का ही
विवरण है। और
जिस सन्यास की
मैं बात कर
रहा हूं वह
वही संन्यास
है जिसकी
कृष्ण बात कर रहे
हैं—करते
हुए
अकर्त्ता हो जाना, करते
हुए भी ऐसे हो जाना
जैसे मैं करने
वाला नहीं हूं।
बस संन्यास का
यही लक्षण है।
गृहस्थ
का क्या लक्षण
है?
गृहस्थ का लक्षण
है, हर चीज
में कर्त्ता हो
जाना।
संन्यासी का लक्षण
है, हर चीज में
अकर्त्ता हो
जाना।
संन्यास जीवन
को देखने का
और ही ढंग है।


