दिनांक 22 सितम्बर सन् 1979;
ओशो आश्रम पूना
प्रश्न—सार:
1—महाप्रयाण के
कुछ दिनों पूर्व पूज्य दद्दाजी ने एक रात चर्चा करते हुए बताया कि वही है, और उसके अलावा कुछ और नहीं।
यह पूछने पर कि
संसार को चलाने वाला कौन है? वे बोले, कोई नहीं। सब अपने आप चल रहा है। जो हो रहा है वह हो रहा है। कोई कुछ कर
नहीं रहा है; सब हो रहा है।
कर्म के
सिद्धांत से संबंधित प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, वह सब बकवास है।
हमने पूछा, फिर हम क्या करें? वे बोले—खाओ, पीओ और आनंद से रहो। बस, इसके सिवाय संसार में कुछ
और नहीं है।
कृपया उनकी इन
उपदेशनाओं पर कुछ कहें।
2—धन और पद के
संबंध में आपके क्या विचार हैं?
3—मैं एक
ज्योतिषी के पास गया था। उसने मेरा हाथ देख कर कहा कि तुम सत्य के खोजी हो और
तुम्हें सदगुरु भी मिल गया है। साधना जारी रखो, एक दिन श्रेय को भी अवश्य उपलब्ध होओगे।
मैं ज्योतिषी या
ज्योतिष पर विश्वास नहीं करता, लेकिन उसकी बातें तो
सभी सत्य थीं। इसका रहस्य क्या है? आप कुछ कहें।



