अध्याय-01 (निर्वाण का वह क्षेत्र)
दिनांक-21 दिसम्बर 1977 प्रातः बुद्ध हॉल पूना में
वज्रच्छेदिका प्रज्ञापारमिता सूत्र-(गौतम बुद्ध की कथा)
ऐसा मैंने एक समय सुना था।
भगवान श्रावस्ती में निवास करते थे।
सुबह-सुबह प्रभु ने कपड़े पहने,
अपना लबादा पहना, अपना कटोरा हाथ में लिया,
और महान नगरी श्रावस्ती में प्रवेश कर गये
भिक्षा एकत्र करने के लिए।
जब वह भिक्षा मांग कर वापस लौटे
भगवान एक वृक्ष की छाया में विश्राम के लिए रूके।
अपना कटोरा और लबादा पास रखे,
पास की नदी में उन्होंने अपने पैर धोये,
और अपने लिए व्यवस्थित स्थान चून कर उस पर बैठ गये,
अपने दोनों पैरों को क्रास कर पद्मासन लगा,
अपने शरीर को सीधा रख कर आंखें बंद कर ली।
सचेतन रूप से अपना ध्यान उसके सामने स्थिर करना।
तभी बहुत से भिक्षु वहाँ पहुँचे
सभी ने भगवान के चरणों को प्रणाम किया
उनके सिर उसके चारों ओर तीन बार घूमे
दाईं ओर, और एक तरफ बैठ गया।

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