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शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

एस धम्मो सनतनां-(ओशो)-भाग-08

एस धम्‍मो सनंतनो
(भाग—8) ओशो


किसी गायक को गीत गाते देखकर तुम्‍हें याद आ जाती है अपने कंठ की कि कंठ तो मेरे पास भी है। और किसी नर्तक को नाचते देखकर तुम्‍हें याद आ जाती है, अपने पैरों की कि पैर तो मेरे पास भी है। चाहूं तो नाच तो मैं भी सकता हूं। किसी चित्रकार को चित्र बनाते हुए देखकर तुम्‍हे भी याद आ जाती है कि चाहूं तो चित्र मैं भी बना सकता हूं। ऐसो ही किसी बुद्ध को देखकर तुम्‍हें याद आ जाती है कि चाहूं तो बुद्धत्‍व मैं भी पा सकता हूं।

ओशो
एस धम्‍मो सनंतनो
भाग—8