जाति-स्मरण अर्थात पिछले जन्मों की स्मृतियों में प्रवेश की विधि पर आपके द्वारा शिविर में चर्चा की है। आपने कहा है कि चित को भविष्य की दिशा से पूर्णत: तोड़ कर ध्यान की शक्ति को अतीत की और फोकस करके बहाना चाहिए। प्रक्रिया का क्रम आपने बताया। पहले पाँच वर्ष की स्मृति में, फिर तीन वर्ष की स्मृति में, फिर जन्म की स्मृति में, फिर गर्भाधान की स्मृति में लौटना, फिर पिछले जन्म की स्थिति में प्रवेश होता है। पूरे सूत्र क्या है? आगे के सुत्र का कुछ स्पष्टीकरण करने की कृपा कीजिएगा?
पिछले जन्म की स्मृतियाँ प्रकृति की और से रोकी गई है। प्रयोजन है उनके रोकने का जीवन की व्यवस्था में जिसे हम रोज-रोज जानते है, जीते है, उसका भी अधिकतम हिस्सा भूल जाए, यह जरूरी है। इसलिए आप इस जीवन की भी जितनी स्मृतियाँ बनाते है। उतनी स्मृतियाँ याद नहीं रखते। जो आपको याद नहीं है, वह भी आपकी स्मृति से मिट नहीं जाती। सिर्फ आपकी चेतना और उस स्मृति का संबंध छूट जाता है।