छठवां प्रवचन--फूल खिलने का क्षण
मेरे प्रिय आत्मन्!पिछली चर्चाओं के संबंध में एक मित्र ने बहुत अजीब प्रश्न पूछा है। अजीब इसलिए कि पहली अजीब बात तो यह है कि वह प्रश्न ही नहीं है। उन्होंने पूछा है, प्रश्न भी पूछा है, साथ लिखा है, अगर आपको पता न हो, तो मैं इसका उत्तर आपको आकर दे सकता हूं।
उन्हें उत्तर पहले से पता है तो व्यर्थ पूछने की परेशानी नहीं करनी चाहिए। और अक्सर ऐसा होता है कि हम पूछते हैं लेकिन उत्तर हमें पता है तो हमारा पूछना झूठा हो जाता है, अॅाथेंटिक नहीं रह जाता। अगर पता ही है, तो बात खत्म हो गई। अगर पता नहीं है, तो ही पूछने में रस है, अर्थ है, खोज का आनंद है। लेकिन हम सभी को...















