सहजो बाई—भारत के संत
बिन घन परत फुुहार-सहजो बाई
अब तक मैं मुक्त पुरूषों पर ही बोला हूं। पहली बार एक मुक्त नारी पर चर्चा शुरू करता हूं। मुक्त पुरूषों पर बोलना आसान था। उन्हें में समझ सकता हूं-वे सजातीय है। मुक्त नारी पर बोलना थोड़ा कठिन है। वह थोड़ा अंजान, अजनबी रस्ता है। ऐसे तो पुरूष ओर नारी अंतरतम में एक ही है। लेकिन उनकी अभिव्यक्ति बड़ी भिन्न-भिन्न है। उनके होने का ढंग उनके दिखाई पड़ने की व्यवस्था उनका व्यक्तित्व उनके सोचने की प्रक्रिया, न केवल भिन्न है बल्कि विपरीत भी है।अब तक किसी मुक्त नारी पर न बोला। सोचा तुम थोड़ा मुक्त पुरूषों को समझ लो। तुम थोड़ा मुक्ति का स्वाद ले लो। तो मुक्त नारी को समझना थोड़ा आसान हो जाए।






















