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रविवार, 6 मार्च 2016

दस हजार बुद्धों के लिए एक सौ गाथाएं—(अध्‍याय--76)

अध्‍याय—छीहत्‍तरवां

 ब हम भगवती के कमरे में पहुंचते हैं तो वह हमें देखकर मुस्कुराती है। उसके दाएं टांग पर पलस्तर चढ़ा हुआ है। मैं उसका हाथ थामती हूं जो कि बिलकुल ठंडा पड़ा हुआ है। उसकी आंखों में झांकती हूं तो पाती हूं कि आंखें आंसुओ से भरी हैं। मैं उसका दर्द महसूस कर सकती हूं और मेरी भी आंखों से आंसू टपक पड़ते हैं।

वह मेरे हाथ को दबाती है और कहती है, 'ओशो ने मुझे बचा लिया। मैंने तो यह चमत्कार घटते देखा। लोकल ट्रेन से मैं प्रवचन के लिए आ रही थी। चर्चगट स्टेशन के पास ट्रेन जैसे ही आहिस्ता हुई, मैं दरवाजे पर आकर खड़ी हो गई। एक लड़के ने मेरा हैंडबैग खींचना चाहा और मेरा संतुलन बिगड़ गया। मैं चलती ट्रेन से प्लेटफार्म पर गिरी, जहां से फिसलकर रेलवे लाइन पर जा पड़ी। लाइन और प्लेटफार्म के बीच बड़ी थोड़ी—सी जगह थी लेकिन मैंने देखा कि मेरा शरीर उस थोड़ी सी जगह में सीधा पड़ा हुआ है और गाड़ी के पहिए मुझे लगभग छूते हुए ही मेरे पास से गुजर रहे थे। जब ट्रेन रुकी तो लोगों ने मुझे बाहर निकाला और मैं बेहोश हो गई।यह घटना सुनाते हुए भगवती की आंखें अपने गुरु के प्रति श्रद्धा से चमक रही हैं। उसके पास दस मिनट बैठने के बाद हम बाहर आ जाते हैं और डॉक्टर से मिलते हैं। डॉक्टर हमें बताता है कि भगवती की टांग तीन महीने में बिलकुल ठीक हो जाएगी।
भगवती ने पूरी परिस्थिति को अहोभाव से स्वीकार कर लिया है। दो सप्ताह हॉस्पिटल में रहने के बाद भगवती घर आ जाती है और पलस्तर उतरने तक बिस्तर पर ही आराम करती है। ये ढाई महीने उसके लिए वरदान की तरह सिद्ध हुए हैं। मैं लगभग रोज ही उससे मिलने जाती हूं और पाती हूं उसका रूपांतरण इतना गहरा हो रहा है कि उसके चेहरे पर भी झलकने लगा है। उसके पास कुछ और करने को है ही नहीं। बस ओशो के टेप प्रवचन सुनती है और ध्यान करती है। अपने अनुभव भी
वह मुझे सुनाती है। ओशो से मैं जब भी मिलने जाती हूं तो वे उसका हाल चाल पूछते हैं।
किसी तरह, तीन महीने बीत जाते हैं और उसका पलस्तर उतारा जाता है। वह बैसाखियों के सहारे चलना शुरू कर देती है, लेकिन जो टांग टूटी थी वह दूसरी टांग से थोड़ी छोटी हो गई है। वह डॉक्टर को दिखाती है, तो वह कहता है, उसके लिए छोटा—सा ओप्रेशन करना पड़ेगा जिसके लिए भगवती तैयार हो जाती है।
ओशो को जब इस बारे में बताया जाता है तो वे उसे संदेश भेजते हैं कि ऑप्रेशन के लिए हॉस्पिटल जाने से पहले वह एक बार उनसे मिलकर जाए।